श्रवण बाधिता के प्रकार
कंडक्टिव (Conductive) श्रवण हानि
कंडक्टिव श्रवण हानि बाहरी या मध्य कर्ण (outer/middle ear) में दोष होने के कारण होती है। इसमें ध्वनि आंतरिक कर्ण (inner ear) तक सही तरीके से नहीं पहुँच पाती।
इस कारण सभी ध्वनियाँ कमज़ोर या धुंधली सुनाई देती हैं।
ऐसे व्यक्ति आमतौर पर बहुत धीरे बोलते हैं, चाहे आसपास कितना भी शोर क्यों न हो।
कंडक्टिव श्रवण हानि के कारण :
- कान नली में मवाद/वैक्स (ear wax)।
- बाहरी तथा मध्य कान की बीमारियाँ जिनमें कान में दर्द और स्राव जैसे लक्षण होते हैं।
- बाहरी या मध्य कान में जन्मजात दोष — बाहरी या मध्य कान की जन्मजात खराबी/क्षतिग्रस्तता।
- ऊपरी श्वसन मार्ग के संक्रमण।
- कान और मौखिक गुहा (मुँह) की अनदेखी/हेर-फेर।
सेंसरिन्यूरल (Sensorineural) श्रवण हानि
सेंसरिन्यूरल श्रवण हानि आंतरिक कान (inner ear) या श्रवण तंत्रिका (auditory nerve) में क्षति या बीमारी के कारण होती है। यह खसरा (measles), कण्ठमाला (mumps), मेनिन्जाइटिस, टी.बी. आदि संक्रामक रोगों के बाद भी हो सकती है।
जन्मजात (Congenital) सेंसरिन्यूरल श्रवण हानि के संभावित कारण:
- वंशानुगत (hereditary) बच्चों की बधिरता।
- आरएच (Rh) असंगतता।
- अपूर्व जन्म (प्रेच्योर) — समय से पहले जन्म।
- जन्म की श्वसन-रुकावट (Birth Asphyxia) — नवजात को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलना।
- गर्भावस्था में वायरल संक्रमण।
- गर्भावस्था के प्रथम तिमाही में एक्स–रे का संपर्क (पहले तीन महीनों में एक्स-रे लेना)।
- मैसिन श्रेणी के हानिकारक दवाएँ (उदा. स्ट्रेप्टोमाइसिन)।
- एकॉस्टिक न्यूरोमा (श्रवण तंत्रिका का ट्यूमर)।
मिक्स्ड (Mixed) श्रवण हानि
मिक्स्ड श्रवण हानि में कंडक्टिव + सेंसरिन्यूरल, दोनों प्रकार की समस्याएँ शामिल होती हैं। इसका मुख्य कारण दीर्घकालिक कान संक्रमण है जिसे क्रॉनिक सप्यूरेटिव ओटाइटिस (CSOM) मीडिया कहा जाता है।
CSOM में कान से मवाद, खून या पानी जैसा स्राव होता है।यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो कंडक्टिव हानि धीरे-धीरे सेंसरिन्यूरल हानि में बदल सकती है।
सेंट्रल (Central) श्रवण हानि
सेंट्रल श्रवण हानि मस्तिष्क में स्थित श्रवण मार्गों (neural pathways) या श्रवण केंद्रों में क्षति, विकृति या संक्रमण के कारण होती है। ऐसा बच्चा सुन तो सकता है, पर सुनी हुई बात को समझने में कठिनाई होती है। कई ऐसे बच्चे जिन्हें slow learner या learning disabled माना जाता है, वे इस प्रकार की श्रवण हानि से ग्रस्त हो सकते हैं।
फंक्शनल (Functional) श्रवण हानि
फंक्शनल श्रवण हानि मानसिक/मनोवैज्ञानिक कारणों या व्यक्तिगत लाभ के लिए सुनने की क्षमता को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने के कारण होती है।
श्रवण बाधिता / विकलांगता की श्रेणियाँ
श्रवण बाधिता विभिन्न स्तरों (degrees) की हो सकती है।
- बाधिता की तीव्रता (dBHL) 500 Hz, 1 kHz और 2 kHz पर प्राप्त ऑडियोमेट्री मूल्यों के औसत से निकाली जाती है।
- भाषण पहचान स्कोर (speech recognition score) स्पीच ऑडियोमेट्री द्वारा मापा जाता है।
- श्रवण विकलांगता (%) निर्धारित फ़ॉर्मूला के आधार पर गणना की जाती है।
- सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाएँ इसी प्रतिशत पर आधारित होती हैं।
श्रवण बाधिता की श्रेणियाँ
| विभाग | हानि की डिग्री | dB स्तर (HL) | भाषण पहचान | श्रवण (%) |
|---|---|---|---|---|
| I | हल्की श्रवण बाधिता | बेहतर कान में 26 से 40 dB | बेहतर कान में 80–100% | कम |
| II (a) | मध्यम श्रवण बाधिता | बेहतर कान में 41 से 60 dB | बेहतर कान में 50–80% | 40% |
| II (b) | गंभीर श्रवण बाधिता | बेहतर कान में 61 से 70 dB | बेहतर कान में 40–50% | 51% |
| III (a) | गहन (Profound) श्रवण बाधिता | बेहतर कान में 71 से 90 dB | बेहतर कान में 40% से कम | 71% |
| III (b) | कुल बधिरता (Total deafness) | बेहतर कान में 91 dB और उससे ऊपर | बहुत कम भिन्नता/खराब डिस्क्रिमिनेशन | 100% |